पौरुषग्रंथि का बढ़ना व सूजन (ENLARGEMENT OF PROSTATE GLAND AND ITS SWELLING)





पौरुषग्रंथि का बढ़ना व सूजन

(ENLARGEMENT OF PROSTATE GLAND AND ITS SWELLING)परिचय :

        पौरुषग्रंथि जब बिना किसी कारण के ही बढ़ जाती है तो वह पेशाब करने में परेशानी उत्पन्न कर देती है। पेशाब के लिये बार-बार जाना पड़ता है। मूत्राशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता है) पूरा खाली नहीं हो पाता। पेशाब जाने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे अभी और पेशाब होगा। इस बढ़ी हुई ग्रंथि में जलन व दर्द नहीं होता। वैसे तो ये ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक उम्र में ही होता है लेकिन कभी-कभी कम उम्र के लोगों को भी हो जाता है।

चिकित्सा :

1. सिनुआर : सिनुआर के पत्तो का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम खायें। साथ ही सिनुआर,करंज, नीम और धतूरे के पत्तों को पीसकर, हांडी में गरम कर, मूत्राशय पर लेप करें।
2. हुरहुर सफेद : सफेद फूलों वाली हुरहुर के पत्तों को पीसकर पौरुष ग्रंथि पर ऊपर से लेप करें।
3. गोरखमुण्डी : गोरखमुण्डी के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में खाने से गर्मी के रोग दूर हो जाते हैं।
4. गुग्गुल : गुग्गुल लगभग आधे से एक ग्राम सुबह-शाम गुड़ के साथ खाने से लाभ होता है।
5. मुनियारा : मुनियारा के जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम खाने से पौरुष ग्रंथि की सूजन दूर होती है।
6. नागदन्ती : 5 ग्राम नागदन्ती की जड़ की छाल को सिनुआर के पत्ते का रस और करंज के साथ सुबह-शाम खाने से लाभ होता है।
7. हुरहुर पीला : पीले हुरहुर के पत्तो को पीसकर नाभि के नीचे लगाने से या बांधने से लाभ होता है।
8. राई : राई को नाभि के नीचे पेडु पर पीसकर लेप करने से पौरुष ग्रंथि की सूजन दूर हो जाती है।

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